
‘फर्जी एनकाउंटर’ मामले में हाईकोर्ट सख्त, 24 साल बाद न्याय की आस
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जशपुर जिले के एक पुराने फर्जी एनकाउंटर मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को जवाबदेह ठहराया है। कोर्ट ने मृतक की पत्नी के मुआवजे के आवेदन पर 45 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
यह मामला एक कथित फर्जी मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने एक ग्रामीण को नक्सली बताकर मार गिराया था। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि मृतक रामनाथ राम (नागवंशी) निर्दोष थे।
जांच में खुली सच्चाई
याचिकाकर्ता संझो बाई के अनुसार, उनके पति को कांसबेल पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर में मार दिया था। पुलिस ने उन्हें नक्सली बताया, लेकिन न्यायिक जांच में यह दावा गलत साबित हुआ।
इसके बाद मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और 11 जून 2002 को सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाया—
- तत्कालीन थाना प्रभारी एच.आर. अहिरवार को गैर-इरादतन हत्या (धारा 304-1) में दोषी ठहराया गया
- पांच अन्य पुलिसकर्मियों को मारपीट (धारा 323/34) के तहत सजा दी गई
मुआवजे के लिए दर-दर भटक रही विधवा
दोषियों को सजा मिलने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक मुआवजा नहीं मिला। संझो बाई ने 24 सितंबर 2024 को जशपुर कलेक्टर के समक्ष आवेदन दिया था, लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने आदेश दिया कि—
- कलेक्टर जशपुर 45 दिनों के भीतर मुआवजे पर निर्णय लें
- याचिकाकर्ता 15 दिनों के भीतर पुनः आवेदन और आदेश की प्रति प्रस्तुत कर सकती हैं
हाईकोर्ट के इस आदेश से पीड़ित परिवार को वर्षों बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।



